Friday, December 12, 2025

ग़ज़ल

मामला यूॅं भी न बिगड़ा होता;

जो जहाॅं था, वहीं रहा होता।

फैसले ठीक ठाक होते, अगर
सलाह मशविरा किया होता

मुस्कुराहट का सिलसिला मेरी जाॅं,
काश, कुछ देर तक चला होता!

मुकाबले की बात तब रहती,
अपने जैसों से सामना होता।

सोच, किस तरह गुज़रती तुझ पे',
तू मिलने आता, और मैं ना होता!

अपने मेयार से गिरा होता,
मैं भी जाने कहां कहां होता!

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