किसी ज़माने में जब हम भी प्यार करते थे,
साथ चलते थे, मुश्किलों को पार करते थे।
हम इसी मोड़ पे मिलते थे, याद है तुमको?
और एक दूसरे का इंतज़ार करते थे।
और जब काली, घनी रातें तगादा करतीं,
दोनों आपस में ही नींदें उधार करते थे।
था कोई वक्त कि जब ऊबते नहीं थे हम,
एक सी बातें वही, बार बार करते थे।
हम तुम्हारे, तुम हमारे लिए मसीहा थे,
दिल के हर दर्द को छूकर बहार करते थे।
यूँ नहीं था कि झगड़ते ही नहीं थे हम तुम,
खुशबुओं में सने रंगों से वार करते थे।
आई जो ऊंच नीच राह में तो बेखटके,
हम एक दूसरे को होशियार करते थे।
अब तो बस रस्म ओ रवायत ही अदा करते हैं,
था कोई दौर कि जब हम भी प्यार करते थे।